बेटियों ने निभाया बेटे का फर्ज : पिता की अर्थी को दिया कंधा, चिता को दी मुखाग्नि

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वाणिज्यिक कर विभाग की इंस्पेक्टर माया वानखड़े के पिता गोविंद राव वर्धे का 100 वर्ष की उम्र में निधन हो गया, उनके कोई पुत्र नहीं था, केवल दो बेटियां हैं

 

भोपाल. जिस पिता का हाथ पकड़कर चलना सीखा। लाड प्यार से पाला, बड़ा किया। अपने पैरों पर खड़ा किया। उसी पिता की अर्थी को जब दोनों बेटियों ने कंधा देकर विदा किया तो लोगों की आंखें नम हो गईं। जिस पिता ने उन्हें लड़कों की तरह पूरी तालीम दिलवाई। नौकरी लगवाई, उस पिता का कर्ज उतारने के लिए लाड़ली बेटियों ने पिता के शव को ना केवल कंधा दिया बल्कि श्मशान घाट जाकर मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार भी किया। गमगीन माहौल के बीच पुरुष प्रधान समाज के सामने बेटियों ने एक उदाहरण पेश कर बता दिया कि लड़के-लड़की समान होते हैं। इस दृश्य को जिसने भी देखा उसकी आंखों से आंसू नहीं रुक सके।

100 वर्ष के थे पिता
कोटरा सुल्तानाबाद स्थित शासकीय आवास निवासी वाणिज्यिक कर विभाग की इंस्पेक्टर माया वानखड़े के पिता गोविंद राव वर्धे बुधवार देर रात इस फानी दुनिया को अलविदा कह गए। उन्होंने एम्स, भोपाल में अंतिम सांस ली। वे 100 वर्ष के थे। गोविंद राव की दो पुत्रियां ही हैं। निधन के बाद अंतिम संस्कार की बात आई तो बेटियों ने कहा कि वे ही पिता का अंतिम संस्कार करेंगी। विभाग के राज्य कर अधिकारी वृहस्पति सिंह ने बताया कि बेटियों की इच्छा के सामने सभी लोगों ने हामी भर दी और भदभदा घाट पर पूरे विधान के साथ बेटियों ने उनका अंतिम संस्कार किया।

बेटियां ही उनका संसार थीं
गोविंद राव वर्धे के लिए उनकी बेटियां ही उनका संसार थीं। परिचितों ने बताया कि उन्होंने बेटियों को कभी बेटे से कम नहीं समझा। दोनों बेटियों को खूब पढ़ाया—लिखाया। बेटियों ने भी पिता की देखभाल में कमी नहीं रखी।





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