एक फोन कॉल जिसके दो हफ्ते बाद अशरफ गनी ने मुल्क छोड़ दिया, बाइडेन के साथ 14 मिनट की बातचीत की इनसाइड स्टोरी

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अफगानिस्तान में आगे क्या होगा? इस सवाल का जवाब पूरी दुनिया ढूंढ़  रही है। तालिबान के काबुल पर कब्जे के बाद अफगानिस्तान की तस्वीर बदली-बदली सी दिखने लगी है। जिस प्रेसिडेंशियल पैलेस से लोकतांत्रिक सरकार चलती थी। वो बंदूकधारियों की रिहाइश बन चुका है। काबुल एयरोपोर्ट के पास हमले की घटना अब सामने आने लगी है। सड़कों पर अफरा-तफरी है। बड़ी संख्या में लोग अपने ही वतन से बाहर निकल जाने की कोशिश में जुटे हैं। सोचिए लोग किस क्षण और किस घड़ी में अपना घर, अपना मुल्क अपनी वो गलियां जहां उसका बचपन गुजरा हो उसे छोड़ पाने की हिम्मत जुटा पाता है। अफगानिस्तान के ईर्द-गिर्द पैदा हो रहे हालात पर एक नजर डालते हैं। इस वक्त सार्वधिक आलोचना किसी शख्स की हो रही है तो वो हैं अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन और अफगानिस्तान के लोगों को उनके हालात पर छोड़कर भाग जाने वाले अशरफ गनी की। दो तस्वीर, दो शख्स, दो देश और एक सवाल। सवाल ये कि आखिर 20 सालों की अमेरिकी मेहनत, अरबों डॉलर की खर्च और प्रशिक्षण के बावजूद अफगानिस्तान हार कैसे गया? अफगानिस्तान में 20 सालों से अमेरिका की मौजूदगी अब एक इतिहास है। वर्तमान में उसका यहां कुछ बचा है तो सिर्फ काबुल में सुपरपावर होने का निशान। अमेरिकी सेना डेडलाइन से पहले ही अफगानिस्तान से निकल गई। फिर चौबीस घंटे बाद सफाई देने के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन सामने आए। राष्ट्र के नाम संबोधन करते हुए एक-एक कर हर आलोचना पर सफाई दी। उन्होंने मिशन एयरलिफ्ट को कामयाब करार दिया और काबुल पर तालिबान के कब्जे के लिए अशरफ गनी को जिम्मेदार ठहराया। वही अशरफ गनी जबकि उनके मुल्क के लोग अपनी जान बचाकर भाग रहे थे, तब वो  एक प्राइवेट विमान से देश छोड़कर भाग गए। अपने 72 साल के राष्ट्रपति अशरफ गनी से लोग उम्मीद करते थे कि उनके राष्ट्रपति लड़ेंगे। लेकिन उन्होंने मैदान छोड़ना ही बेहतर समझा। अब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी के बीच आखिरी बार हुए संवाद का खुलासा हुआ है। जिसमें कहा जा रहा है कि बाइडेन ने गनी से 14 मिनट तक बातचीत की है। अमेरिकी राष्ट्रपति से इस बातचीत के दो हफ्ते बाद ही अशरफ गनी ने अफगानिस्तान छोड़ दिया था। 

बिस्मिल्लाह खान को कमान देनी की  बात कही 

दोनों के बीच  समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में दोनों के बीच हुए संवाद का पूरा ब्यौरा दिया है। रॉयटर्स ने राष्ट्रपति के फोन कॉल की एक ट्रांस्क्रिप्ट की समीक्षा की है और बातचीत को प्रमाणित करने के लिए ऑडियो भी सुना है। जिसके अनुसार जो बाइडेन ने गनी से कहा कि मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि मैं आप से ज्यादा एक सैन्य आदमी नहीं हूं, लेकिन मैं हमारे पेंटागन के लोगों और हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा लोगों के साथ मिल रहा हूं, जैसा कि आप हमारे और आपके साथ हैं, और जैसा कि आप जानते हैं। इसके साथ ही बाइडेन ने कहा कि मेरा मानना ​​है कि तालिबान के खिलाफ लड़ाई के मामले में चीजें ठीक नहीं चल रही हैं। अगर वह (गनी) तालिबान के हमले के खिलाफ कोई योजना बनाते हैं तो अमेरिका सहायता प्रदान करेगा। जो बाइडेन ने फोन कॉल पर कहा कि बिस्मिल्लाह (रक्षा मंत्री बिस्मिल्लाह खान मोहम्मदी) को तालिबान से लड़ने की जिम्मेदारी जी जाए और अफगानिस्तान अपना आगे का प्लान रखता है उसके  बाद अमेरिका मदद बढ़ा सकता है।

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 तालिबानी लड़ाकों से लड़ने में सक्षम हैं 3 लाख अफगान फोर्स 

बाइडेन ने कहा कि आपके पास स्पष्ट रूप से सबसे अच्छी सेना है, 70 से 80 हजार तालिबानी लड़ाकों की तुलना में 3 लाख की अच्छी तादाद वाले सशस्त्र बल हैं और वे स्पष्ट रूप से अच्छी तरह से लड़ने में सक्षम हैं। बाइडेन ने अशरफ गनी से कहा था कि वह तभी सैन्य मदद देंगे, जब वह सार्वजनिक तौर पर तालिबान को रोकने का प्लान सामने रखेंगे। जो बाइडेन द्वारा चिंता व्यक्त की गई थी कि अशरफ गनी सरकार का रवैया तालिबान के खिलाफ लड़ाई के लिए सीरियस नहीं है, जिसका दुनिया में गलत संदेश भी जा रहा है। इसके साथ ही अमेरिका की तरफ से अफगानिस्तान नेताओं को सामने आकर प्रेस कॉन्फ्रेसं करने की सलाह दी थी और तालिबान के खिलाफ रणनीति का ऐलान करना चाहिए ताकि छवि बदली जा सकी। 

गनी ने पाकिस्तान को लेकर जताई आशंका

बाइडेन के साथ बातचीत में अशरफ गनी की ओर से तालिबान को मिल रही पाकिस्तान की सपोर्ट का भी जिक्र किया है। गनी ने कहा कि तालिबान पूरी ताकत के साथ हमला कर रहा है। और इसमें पाकिस्तानी का उसे पूरा समर्थन मिल रहा है। लगभग 10 से 15,000 आतंकवादी पाकिस्तान की ओर से दिए गए हैं। ताकी तालिबान के साथ पाकिस्तानी आंतकी मिलकर अफगान फोर्सज का मुकाबला कर सके। बाइडेन ने गनी को सलाह दी कि वह पूर्व राष्ट्रपति हामिज करजई को साथ लेकर चलें, तो इसपर गनी ने कहा कि वह कोशिश कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि करजई उन्हें (अशरफ गनी) अमेरिका का नौकर बोलकर कोस रहे थे। 

 बाइडेन ने गनी के सिर फोड़ा ठीकरा

अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों के निकलने के चौबीस घंटों के बाद राष्ट्रपति बाइडेन सामने आए और राष्ट्र के नाम संबोधन करते हुए एक-एक कर हर आलोचना पर सफाई दी। राष्ट्रपति बाइडेन ने अफगानिस्तान नेताओं पर आरोप मढ़ते हुए कहा कि  अफगानिस्तान के नेता वहां के लोगों के हित के लिए एकजुट होने में विफल रहे। वह अपने देश के भविष्य के लिए समझौता नहीं कर पाए। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना अगर अफगानिस्तान से नहीं हटती तो वो ऐसा कभी नहीं करते। उन्होंने कहा कि हमारे प्रतिद्वंद्वी चीन और रूस चाहते थे कि अमेरिका अफगानिस्तान में अपने करोड़ों डॉलर बर्बाद करे। – अभिनय आकाश

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