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काव्य रूप में पढ़ें श्रीरामचरितमानस: भाग-18

माता हैं श्री जानकी, और पिता हैं रामरघुनंदन हैं जिस जगह, वही अयोध्या धाम।वही अयोध्या धाम, सुनो मेरे प्रिय लखनाइन दोनों का ध्यान, तुम्हें हर…

Gyan Ganga: सभी वानरों में माता सीता जी को खोजने की धुन सवार थी

भगवान श्रीराम जी ने अपना संदेशवाहक चुन लिआ था। स्वाभाविक है कि श्रीराम जी ने जिन्हें मुद्रिका दी, वही श्रीहनुमान जी ही उनके मुख्य संदेश वाहक…

Gyan Ganga: माता सीताजी के पास हनुमानजी को ही इसलिए भेजा था भगवान श्रीराम ने

भगवान श्रीराम जी का चयन भला अनुचित कैसे हो सकता है? वास्तव में सत्य तो यह है कि वे जिसे भी चुन लें, वही उचित पात्र हो जाता है। उन्होंने…

काव्य रूप में पढ़ें श्रीरामचरितमानस: भाग-17

तब तक सीता आ गयी, बैठी चरणों पासउसकी इच्छा का हुआ, माता को आभास।माता को आभास, जहां भी होंगे स्वामीमेरा व्रत है, उनके पथ की हूं अनुगामी।कह…

Gyan Ganga: सीताजी के पास भेजने के लिए श्रीराम ने आखिर हनुमानजी को ही क्यों चुना था?

भगवान श्रीराम जी ने अपने मन की पूरी अवस्था श्रीहनुमान जी के समक्ष खोल कर रख दी। श्रीसीता जी के प्रति श्रीराम जी के मन में कितना आदर, प्रेम व…

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Gyan Ganga: हनुमानजी को अंगूठी देने के बाद क्या समझा रहे थे भगवान श्रीराम

भगवान श्रीराम जी अपने प्यार व दुलार की वर्षा करते थक नहीं रहे हैं। और वानर, भालू व अन्य वन्य प्राणी भक्त भी, इस दैवीय बारिश में भीगने का…

काव्य रूप में पढ़ें श्रीरामचरितमानस: भाग-16

अच्छा हो तुम राम को, यहां बुलाओ ताततब सुलझेगी शीघ्र ही, सारी बिगड़ी बात।सारी बिगड़ी बात, राम सुनते ही धायेदेख वहां का दृश्य, नैन उनके भर…

Gyan Ganga: श्रीहनुमानजी ने आखिर क्यों श्रीरामजी की मुद्रिका को अपने मुख में रख लिया था?

श्रीराम जी ने जो राममुद्रिका श्रीहनुमान जी को दी, उस मुद्रिका का श्रीहनुमान जी ने क्या किया होगा? क्या श्रीहनुमान जी ने वह मुद्रिका स्वयं…

Gyan Ganga: भगवान श्रीराम से मुद्रिका लेने के बाद आखिर क्या सोच रहे थे हनुमानजी

करोड़ों की संख्या में वानर श्रीराम जी को प्रणाम करके श्रीसीता जी की खोज में संलग्न हेतु तत्पर थे। लेकिन श्रीहनुमान जी का कोई तो गहन चिंतन…

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