Vishwakarma puja 2020:- विश्वकर्मा पूजा करने से घर और व्यापार में आती है सुख – समृद्धि, जानिए विधिवत पूजा का तरीका

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हर साल 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा मनाई जाती है । हर साल अश्विनी मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को विश्वकर्मा पूजा मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। शास्त्रों के अनुसार विश्वकर्मा जी का जन्म कन्या संक्रांति के दिन हुआ था। इसी कारण हर साल कन्या संक्रांति पर इनकी पूजा की जाती है।

मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा के पूजन-अर्चन किए बिना कोई भी तकनीकी कार्य शुभ नहीं माना जाता। इसी कारण विभिन्न कार्यों में प्रयुक्त होने वाले औजारों, कल-कारखानों में लगी मशीनों की पूजा की जाती है। भगवान विश्वकर्मा के जन्म को लेकर शास्त्रों में अलग-अलग कथाएं विख्यात हैं। वराह पुराण के अनुसार ब्रह्माजी ने विश्वकर्मा को धरती पर उत्पन्न किया। वहीं विश्वकर्मा पुुराण के अनुसार, आदि नारायण ने सर्वप्रथम ब्रह्माजी और फिर विश्वकर्मा जी की रचना की।

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इस दिन अपने कामकाज में उपयोग में आने वाली मशीनों को साफ करें। फिर स्नान करके भगवान विष्णु के साथ विश्वकर्माजी की प्रतिमा की विधिवत पूजा करनी चाहिए। ऋतुफल, मिष्ठान्न, पंचमेवा, पंचामृत का भोग लगाएं। दीप-धूप आदि जलाकर दोनों देवताओं की आरती उतारें।

विश्वकर्मा की पूजा इसलिए की जाती है क्योंकि उन्हें पहला वास्तुकार माना गया था, मान्यता है कि हर साल अगर आप घर में रखे हुए लोहे और मशीनों की पूजा करते हैं तो वो जल्दी खराब नहीं होते हैं। मशीनें अच्छी चलती हैं क्योंकि भगवान उनपर अपनी कृपा बनाकर रखते हैं। भारत के कई हिस्सों में हिस्से में बेहद धूम धाम से मनाया जाता है।

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